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स्वामी विवेकानंद जी ने अपने विमल चरित्र के प्रभाव से राजाधिराज से लेकर एक मेहतर तक के हृदय पर अधिकार प्राप्त कर लिया

स्वामी विवेकानंद जी ने अपने विमल चरित्र के प्रभाव से राजाधिराज से लेकर एक मेहतर तक  के हृदय पर अधिकार  प्राप्त कर लिया,Swami Vivekananda ji acquired the right over the heart from Rajadhiraj to a scavenger with the effect of his Vimal character स्वामी विवेकानंद जी ने अपने विमल चरित्र के प्रभाव से राजाधिराज से लेकर एक मेहतर तक  के हृदय पर अधिकार  प्राप्त कर लिया,Swami Vivekananda ji acquired the right over the heart from Rajadhiraj to a scavenger with the effect of his Vimal character स्वामी विवेकानंद का चरित्र बहुत ही सरल और बहुत ही सादर था और दूसरों का कथित करने वाला था वह इतने लोगों में प्रिय खेल की उन्होंने अपने को लोगों के बीच बहुत ही प्रसिद्ध कर लिया था यह सब सिर्फ उनके चरित्र के कारण ही हुआ आइए उनकी ऐसी एक घटना के बारे में जानते हैं जो कि स्वामी विवेकानंद चरित्र की किताब से लिया गया है। एक बार मैंसूर के दीवान आरके शेषाद्री बहादुर की स्वामी जी से भेंट हुई। उन्होंने, इनकी ओर आकर्षित होकर, मैसूर नरेश महाराजा चमराजेंद्र वाडियर बहादुर को इनसे परिचित करा द...

जब स्वामी विवेकानंद जी ने वेदांत की व्याख्या की,When Swami Vivekananda explained Vedanta

  जब स्वामी विवेकानंद जी ने वेदांत की व्याख्या की,When Swami Vivekananda explained Vedanta जब स्वामी विवेकानंद जी ने वेदांत की व्याख्या की,When Swami Vivekananda explained Vedanta एक दिन दीवान बहादुर की के सभापतित्व में राजप्रसाद में एक विचार सभा बुलाई गई। बैंगलोर नगर के प्रायः सभी पंडितगण इस सभा में सम्मिलित हुए। वेदांत पर विचार आरंभ हुआ पंडितगण वेदांत के विभिन्न मतवादों का समर्थन कर वाद-विवाद में प्रवृत्त हुए। अपने अपने मत की स्थापना की आकांक्षा से दूसरों के मत को भ्रांत प्रमाणित करने के लिए तर्क वितर्क की खूब आंधी उठी - परंतु बहुत समय व्यतीत होने पर भी लोग किसी सिद्धांत पर ना पहुंच सके। अंत में दीवान बहादुर के अनुरोध से स्वामी जी खड़े हुए और श्रद्धा के साथ उन्होंने उपस्थित मंडली का अभिवादन किया। उनके देवी लावण्यामंडित मुख्यमंडल तथा उज्जवल विशाल नेत्रों ने थोड़ी ही देर में वयोवृद्ध विद्वान पंडित मंडली के हृदय पर अपना अधिकार जमा लिया। स्वामी जी ने अपने  स्वाभाविक मधुर कंठ से संतुलित संस्कृत में अपूर्व  युक्ति द्वारा प्रमाणित कर दिया कि सर्व संदेह विनाशक वेदांत...