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जानिए क्या है छठ पूजा क्यों की जाती है छठ पूजा और क्या इसका महत्व CHHATH POOJA

जानिए क्या है छठ पूजा क्यों की जाती है छठ पूजा और क्या इसका महत्व CHHATH POOJA 2019 जानिए क्या है छठ पूजा क्यों की जाती है छठ पूजा और क्या इसका महत्व CHHATH POOJA 2019 क्या है छठ पूजा ? एक प्राचीन हिंदू त्योहार, जो सूर्य और छठी मैया (सूर्य की बहन के रूप में जाना जाता है) को समर्पित है, छठ पूजा बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल देश के लिए अद्वितीय है। यह एकमात्र वैदिक त्योहार है जो सूर्य देव को समर्पित है, जो सभी शक्तियों और छठी मैया (वैदिक काल से देवी उषा का दूसरा नाम) का स्रोत माना जाता है। प्रकाश, ऊर्जा और जीवन शक्ति के देवता की पूजा भलाई, विकास और मानव की समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए की जाती है। इस त्योहार के माध्यम से, लोग चार दिनों की अवधि के लिए सूर्य देव को धन्यवाद देने का लक्ष्य रखते हैं। इस त्योहार के दौरान उपवास रखने वाले भक्तों को व्रती कहा जाता है। Click here to read more about chhat pooja https://thinknmotivate.blogspot.com/2019/10/25-top-chhath-geet-most-popular-songs.html, https://thinknmotivate.blogspot.com/2019/10/blog-post_31.html, https:/...

Chitragupt Katha in Hindi

चित्रगुप्त की कथा मंत्री श्री धर्मराजस्य चित्रगुप्तः शुभंकरः। पायान्मां सर्वपापेभ्यः शरणागत वत्सलः॥ एक बार युधिष्ठिरजी भीष्मजी से बोले- हे पितामह! आपकी कृपा से मैंने धर्मशास्त्र सुने, परन्तु यमद्वितीया का क्या पुण्य है, क्या फल है यह मैं सुनना चाहता हूँ। आप कृपा करके मुझे विस्तारपूर्वक कहिए। भीष्मजी बोले- तूने अच्छी बात पूछी। मैं उस उत्तम व्रत को विस्तारपूर्वक बताता हूँ। कार्तिक मास के उजले और चैत्र के अँधेरे की पक्ष जो द्वितीया होती है, वह यमद्वितीया कहलाती है। युधिष्ठिरजी बोले- उस कार्तिक के उजले पक्ष की द्वितीया में किसका पूजन करना चाहिए और चैत्र महीने में यह व्रत कैसे हो, इसमें किसका पूजन करें? भीष्मजी बोले- हे युधिष्ठिर, पुराण संबंधी कथा कहता हूँ। इसमें संशय नहीं कि इस कथा को सुनकर प्राणी सब पापों से छूट जाता है। सतयुग में नारायण भगवान्‌ से, जिनकी नाभि में कमल है, उससे चार मुँह वाले ब्रह्माजी उत्पन्न हुए, जिनसे वेदवेत्ता भगवान्‌ ने चारों वेद कहे। नारायण बोले- हे ब्रह्माजी! आप सबकी तुरीय अवस्था, रूप और योगियों की गति हो, मेरी आज्ञा से संपूर्ण जगत्‌ को शीघ्र रचो। हरि के ऐसे वच...